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Genetics के कारण गर्भपात के लिए कोनसे Tests करे?

एक cell या पेशी में 46 chromosomes होते है। Genetic खराबियाँ हम तीन लेवल्स पे classify कर सकते है जैसे की Chromosomal defect Single, Chromosome defect, Internal defect in the chromosome.

अगर 46 chromosome होने के बदले उससे ज्यादा है या कम है जिसे low resolution कहा जाता है। Mid resolution में जो क्रोमोसोम्स के व्यवस्था में गड़बड़ होती है । अगर chromosome के अंदर के material में कुछ खराबी हो तो उसे high resolution खराबी कही जाती है।

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    Genetic testing during pregnancy

    जानते है की अलग अलग लेवल के genetic खराबी हो तो उसकी जाँच कैसे करे?

    • Low resolution के खराबी के लिए Low resolution genetic testing की जाती है जिसमे karyotype नाम की test की जाती है। Karyotype testing में खून मेसे White blood cells को Culture करके उनके Slides बनाके staining करके उसको Microscope में जांचा जाता है। इसमें sub Micrscopic कोई Defect हो तो वह Micrscope में पकड़ में नहीं आएगी। इसमें Chromosmes के संख्या की जांच की जाती है।
    • 2nd Level के Genetic testing हर एक chromosome को देखा जाता है जिसे Copy number variation (CNV) कहा जाता है। इसे देखने केलिए डॉक्टर्स Cytogenetic microarray testing या MLPA का इस्तमाल किया जाता है।
    • 3 rd Level के टेस्ट में Chromosome के अंदर के Material की जांच होती Next-generation sequencing (NGS) इसमें DNA के लेवल पे जाके DNA के दो Strands को अलग करके हर nucleotide का position क्या है वह और दोनों DNA’s पे refernce के Nucleotides समान है या नहीं इसकी जांच की जाती है।

    ऐसी कोई भी test नहीं है जिसमे एकसाथ इन सभी की जांच हो।

    अगर किसी परिवार में , बार बार abortion हो रहा है तो genetic consultants , क्या फॅमिली के history की जांच करते है ताकि abortion का कारण पता चले। इस वक्त पति और पत्नी दोनों तरफ से detail में family history ली जाती है। इससे ये पता करने केलिए आसान पड़ता है की यह किस तरीके का genetic disorder है।

    दूसरे तरीके का genetic disorder होता है जिसके कारण गर्भपात होता है वह fertilization के समन्धित होता है। जैसे हमें पता है की हमारे शरीर के हर पेशी में ४६ chromosomes होते है पर जब जब gamets बनते है मतलब शुक्राणु और अंडा जब बनता है है तब उसमे 23 chromosomes होते है। fertilizartion जब होता है तब भ्रूण को 23 chromsome माँ के तरफ से और 23 chromosome पिता के तरफ से मिलते है और 46 chromosome होते है। जैसे जैसे दम्पति की आयु बढ़ती है वैसे chromosomal defect आने लगते है जिसमे chromosome की संख्या में गड़बड़ होती है जिसे chromosomal aneuploidy कहा जाता है। जिसके कारन गर्भपात या बच्चो में defect आने के जैसे की down syndrome जैसे डिफेक्ट हो सकते है , और जैसे जैसे महिलाओ की उम्र बढ़ती है वैसे ही chromosomal defect होने की सम्भवनाये ज्यादा होती है।

    अगर किसी महिला की उम्र 25 रहेगी तो बच्चे में chromosomal aneuploidy होने के risk 710 में 1 होता है , जैसे 35 उम्र हो तो risk 250 में 1 का होगा , 40 की उम्र में यही risk 50 में 1 रहता है और 44 साल पर risk 15 में एक का रहेगा। इसलिए प्रेगनेंसी में इससे सम्बंधित testing भी काफी महत्वपूर्ण है।

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    Dr. Anup Rawool

    Consultant Medical & Cancer Geneticist
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