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नवजात शिशु में पीलिया क्यों होता है?

जब बच्चा NICU में आता है या बच्चा पैदा होता है, तो बोहोत बार आप सुनते है की बच्चे को jaundice हुआ है। भारत में 10 – 15 % बच्चो को jaundice की treatment लगती है। लेकिन अब इसके treatment ऑप्शन इतने अच्छे available है की अब डरने की बात नहीं है।

नवजात शिशु को Jaundice क्यों होता है?

जो Adult Jaundice होता है वो अलग कारणों से होता है। जैसे की खाने में problems , पानी में problems , या ब्लड में problems इसके वजह से होता है।

छोटे बच्चों में Jaundice होने के ये कारण हो सकते है

  1. माँ और बच्चे का Blood Group अलग अलग होना। जिसको Blood Incompatibility कहा जाता है।
  2. Low Birth Weight , जिस बच्चे का वजन 2.5 kg से कम है।
  3. Preterm or premature birth : जो बच्चे समय से पहले पैदा हुआ हो।
  4. बच्चा जब दूध अच्छे से नहीं लेता।
  5. Dehydration Jaundice
  6. Breast Milk Jaundice
  7. Forceps डिलीवरी के कारन भी jaundice होता है।

जब बच्चे को jaundice पैदा होते ही होता है तो वो काफी हानिकारक हो सकता है। उसको जल्द से जल्द treatment की जरुरत होती है। जो jaundice तीसरे चौथे दिन होता है वह काफी सामान्य है और हर एक बच्चे को होता है जिसको Physiological Jaundice कहा जाता है। अगर Physiological Jaundice की लेवल 15 से ऊपर हो जाती है तो उसके लिए treatment लगती है।

Jaundice के लक्षण

  • बच्चा पीला दिखने लगता है।
  • बच्चे की palms और sole पिले दिखने लगते है।

जब बच्चा हॉस्पिटल में होता है तब डॉक्टर्स बच्चे की जांच कर रहे होते है। Transcutaneous billirubin (TcB ) इस से jaundice की जांच की जाती है।

Jaundice की Treatment

  • Phototherapy (२-३ दिन के लिए )
  • कभी कभी blood exchange भी करना पड़ता है (३ महीने में एक बार )

बच्चा ठीक होक २-३ दिन में घर जानेके बाद फिरसे pediatrician को दिखाना चाहिए ताकि डॉक्टर जांच करे की बच्चा ठीक से फीड हो रहा है या नहीं , बच्चे का वजन कितना कम हुआ है और बच्चे में jaundice कितना बचा है। बच्चे का रेगुलर checkup करना बोहोत महत्वूर्ण है।

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